जिनके बनाये साढे पांच सो सालों के खूबसूरत बीकानेर मैं हम बैठे हैं,जिन्होंने हमारे पूर्वजों को जीना सिखाया और हमें अपने बच्चों की तरह समझा उन रियासतकालीन सूरमाओं के बड़प्पन का आज अहसास होता है.जमाना कितना ही बदल जाए,विज्ञानं कितनी भी तरक्की करले,लोग कितने ही अग्रणी हो जायें,चाहे कुछ भी बदल जाए,नहीं बदलेगा ये एतिहासिक परिवेश,नहीं पुराणी होगी लोगों के मन की श्रद्धा भावना और नहीं पुराना होगा लोगों का विश्वाश.राजे महाराजाओं ने ये कब सोचा था की कभी वे चुनाव लडेंगे,यदि ऐसा सोचा होता तो कहानी कुछ और ही होती और वे इसी लालच मैं आकार अपनी भूमिकाएं तय कर लेते.कहते हैं कि भारत के लोग श्रद्धा और प्रेम का कामयाब प्रतिकार करना जानते हैं,हम लोग अपने राजे महाराजाओं को इश्वर का प्रतिनिधि मानते रहे हैं,उनके सजदे मैं हम सदेव अपने आपको इसलिए प्रस्तुत करते रहे हैं कि उनके दम से हमने अपने आपको जिया है और उन्होंने हमें अपने बच्चों कि तरह पाला पोषा है.बहरहाल सदियाँ बीत गई हैं,राजा महाराजा नहीं रहे हैं लेकिन आज भी रियासतकालीन सच्चाई वैसी कि वैसी हैं,हम आज भी सेंकडों सालों के उस वीरतापूर्ण परिवेश मैं बैठे हैं जो तत्कालीन हमारे राजा महाराजाओं द्वारा निर्मित किया गया था और कितनी शानदार दूरदर्शिता को हम आज देखते हैं कि संसाधनों कि अल्पता के उस काल मैं भी इन आलीशान शानदार लोगों ने हमारे आज का ख्याल रखा और आज भी हम उनके द्वारा निर्धारित परिवेश मैं स्थापित हैं।
भूमिका का तात्पर्य यह है कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और सामाजिकता उसे सदियों से विरासत मैं मिलती आ रही है.गिव एंड टेक का सिद्धांत हमारी परम्परा है,हम उस प्रत्येक बात को कभी नहीं भूलते जो हमारे लिए बेहतर हो या रही हो,चाहे वो कितनी भी पुराणी बात हो,हमारा जमीर उस देन को भूलने नहीं देता जो हमें कहीं से भी मिली हो,हमारी संस्कृति हमें पुरातन अतीत कि हर पल याद दिलाती है।
बीकानेर कि बात करें तो यह पुरातन शहर उस खूबसूरत अतीत का शानदार साक्षी है जो हमारे लिए रियासतदारों ने बेहद हेरिटेज स्वरुप मैं छोड़ा है,हम ही नहीं समूचा संसार बीकानेर कि स्थिति और इसकी प्राकृतिक सुन्दरता के गीत गाता है ,बीकानेर को देखने सारा संसार आता है,ऐसे शानदार बीकानेर के निर्माण का श्रेय जिन लोगों को जाता है वे और उनकी पीढी आज भी बीकानेर की जनता के लिए आदरणीय एवं सम्मानीय हैं.बीकानेर के लिए उन्होंने जो कुछ किया वो भुलाया नहीं जा सकता और बीकानेर की जनता की भूलने कि आदत भी नहीं है,जनता राजपरिवार और उनके वजूद के लिए कुछ भी करने को तत्पर और तैयार है.
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