Tuesday, November 4, 2008

तूफानों से बुझते नहीं दिये

निर्बल नहीं होता कभी नन्हा सा दिया
तूफानों से बुझता नहीं रोशनी का दिया
आत्मबल का अभाव होता है तूफानों की तेजी में
संकल्पों का विश्वास होता है नन्हें दीपक की ज्योति में
तिमिर का एक एक जर्रा ख़त्म करता है दिया
अंधेरों की काली चादर फैलता है बेलगाम तूफ़ान
काली चादर को भेद देता है नन्हें दिए का शालीन अनवान.....

2 comments:

RAJ BIJARNIA said...

तुसी छा गए गुरू..!

लगे रहो , हम आपके साथ हैं !

- राज बिजारनियाँ

Unknown said...

good this is you
nirmal