Wednesday, October 22, 2008

लोगों की दुकान

लोगों की दुकान चलाने वाले, किस होश मैं भीगा फिरता है !!!
तेरे मन की अभिमानी हालत,सच्चाई से बडी दूर है
जो सीट मिली है तुझे पल भर,वो दुनिया का दस्तूर है
तेरे जैसे सूटेड बूटेड कई आए कई चले गए
कुछ चल निकले दो पल,कुछ होश गंवाए पडे रहे
आनन फानन तेरा ये जीवन,बर्बाद तुझे कर डालेगा
आंख खुलेगी जब तेरी,तूं चौंक चौंक कर उछलेगा
अपने अस्तित्व का भान करना सीखले उत्साही न बन
सदा ही नहीं रहते जीवन में महकते शालीन उपवन
किक एक लगेगी जब किसी छोटी सी नासाज गलती पर
पल भर में समझ अज्येगा तुझे की तूं है किस धरती पर!!!

नितगुन

कोई भी इन्सान तब तक ही तुझे सोचेगा
जब तक तू उसके काम का है
तेरे मन में चाहे अपनेपन के हिलोर उमड़ें
वो तो तेरा पैमाना नाप कर स्वार्थ देखता है
तेरे संस्कार तेरे हैं तेरे खून में गिरावट नहीं है
तूं चाह कर भी हद से नीचे नहीं गिर सकता
पर चिंता न कर तेरा भरोसा पक्का है
अन्तत तेरा विश्वाश तो जीतेगा ही
वो मरेंगे बेवजह जिनको तेरी खुद्दारी
पर यकीन नहीं.......

Sunday, October 19, 2008

कठै गया बै गांव????

चरभर चरभर खेलता गैरी जाल्लां री छांव!
बटाऊ आंव्ता-जान्व्ता नासेठू गैला मांय,
लुक मीचणी कुरा घुत्तो धोलियो भाटो खेलता,
झाद्दकी री बाड़ा मान्खर बा चालती लाय.....
कोई तो मने बताओ रै कठै गया बै गांव ???
काचर खेलरी फोफलिया,काकदिये रा बीज,
खेरडी पर मांड्यो हिंदों सावनियै री तीज,,
लुळ लुळ हिंडती तीजन्याँ लहरिये री खीज,
सुरंगों बायरो सिरकतो होलै साँव साँव ,,,,
कोई तो मनै बताओ रे भाई कठै गया बै गांव.....
कठै गया बै गांव,कठै गया बै गांव ............?

सिलसिला

उम्र भर रास आया यही सिलसिला
बनाते रहे कल्पना का किला,
कटे पंख लेकिन कभी तो उडेंगे,
गगन से अगर निमंत्रण जो मिला!!!!!

माँ - एक किवदन्ती,एक अभूतपूर्व सच्चाई

मैनें एक बार माँ से कहा था-"माँ मुझे रात को डर लगता है1उस रात से मैनें माँ को कभी रात को सोते हुए नहीं देखा"।
सहज अंदाज मैं बडी से बडी समस्या का निवारण माँ !
अद्भुत साहस अविकल अहसास का आभास माँ !!
चूल्हे चाकी पनघट बाखल होकर हर पल आसपास माँ !!!
पलक झपकते अहसासों की आवृति स्पंदन का मधुमास माँ !!!!
जिजीविषा ही रही तेरे क़दमों मैं पुष्प बिछाने की ममतामयी,
तेरे भीतर के पुराने फफोलों को सहलाने की तुझे बहलाने की ,
सिहर उठता हूँ यह सोच कर कि किस कदर सिहरती रही है तूँ,
तेरे जीवन का एक एक पल क्योंकर सिहर सिहर गुजरा होगा?
संसाधनों के बियावनों में मुझे बचाने को क्या क्या न किया होगा तूने !
अपनी गोद मैं उठा कर मीलों तक अनथक पैदल चलने वाली देवी!!!
स्निग्ध सुकोमल उस पावन स्पर्श को तत्समय मैं मूढ़ न जान सका !


जीने के लिए जरूरी टिप्स-साबुन से हाथ धोलो नहीं तो जीवन से हाथ धो बैठोगे

हमारा देश आज भी आम आदमी को बिमारियों से मुक्त करने में कामयाब नहीं हो पा रहा है,समूचा विश्व आज अपने नागरिकों को स्वस्थ जीवन देने की हर मुमकिन कोशिश कर रहा है,यू.एन.ओ.के यूनिसेफ ने भारत में सम्पूर्ण स्वास्थ्य के मध्यनजर महत्वपूर्ण पहलकदमी की है,बहुत आश्चर्य की बात है की भारत में आज भी दो लाख टन मैला रोजाना धरती पर खुले में फैलता है,यानि हमारे देश की पैंसठ प्रतिशत आबादी खुले में शोच करती है,इस खुली गंदगी से फैलने वाले किटानू हमारी क्षमता को रोक कर प्रतिरोधक क्षमता को खत्म करते हैं.यह आश्चर्य की बात है कि एक ग्राम मानव मल में एक करोड़ बैक्टेरिया होते हैं जो शारीरिक नुकसान पहुँचने में समर्थ होते हैंहमारे देश में आज भी रोजाना एक हजार बच्चे गंदगी के कारन मौत के मुंह में चले जाते हैं,एक हजार माताओं की कोख रोजाना सूनी हो जाती है,यानि प्रतिदिन एक रेल दुर्घटना का आंकडा हम रोजाना देखते हैं।
पन्द्रह अक्टूबर को हमने ग्लोबल हैण्ड वाशिंग डे मनाया,इसके पीछे की मूल भावना भी गंदगी से हो रही बर्बादी की जानकारी जन जन तक पहुँचाना था.हमारे देश में सिर्फ़ पैंतीस फीसदी लोग खाना खाने से पहले हाथ अच्छी तरह धोते हैं,इसी प्रकार मात्र पैंसठ फीसदी लोग शोच के बाद साबुन से हाथ धोते हैं,इस कारन गंदगी का अवशेष हाथों के माध्यम से मानव शरीर के भीतर चला जाता है और बीमारी लगातार बनी रहती है।
भारत सरकार ने सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान चला कर गंदगी के विरूद्ध जंग छेड़ दी है,सन २०१२ तक समूचा भारत घर घर में शोचालयों से युक्त होगा ऐसा संकल्प संजोया गया है.इसे अंजाम तक पहुँचने के लिए सरकार ने निर्मल ग्राम पुरस्कार योजना प्रारम्भ की है,जिसके तहत सम्पूर्ण स्वच्छता के सभी सात घटक पूरे करने वाली ग्राम पंचायतों को राष्ट्रीय निर्मल ग्राम पुरस्कार एक भव्य समारोह में भारत के महामहिम राष्ट्रपति द्वारा दिया जाता है.इस परिणाम को देखकर संतुष्टि है की जहाँ वर्ष २००३ में ऐसी पंचायतों की संख्या शून्य थी,२००४-०५ में ३८ पंचायतों को निर्मल ग्राम पुरस्कार मिला,वर्ष २००५-०६ में यह संख्या बढ़ कर ७६० हो गई वहीं २००६-०७ में देश की ४९४५ ग्राम पंचायतों को निर्मल ग्राम पुरस्कार प्राप्त हुआ .इस वर्ष २००७-०८ में यह संख्या बढ़ कर ग्यारह हजार पंचायतों से भी अधिक हो गई,स्पष्ट है की भारत में स्वच्छता के प्रति जागृति तेजी से बढ़ रही है।
निर्मल ग्राम पुरस्कार के तहत एक हजार आबादी वाली पंचायत को पचास हजार रूपये,दो हजार आबादी तक वाली पंचायत को एक लाख रूपये,पॉँच हजार आबादी तक वाली पंचायत को दो लाख रूपये,दस हजार तक आबादी वाली पंचायत को चार लाख रूपये तथा दस हजार से अधिक आबादी वाली पंचायत को पॉँच लाख रूपये पुरस्कार के रूप में दिए जाते हैं।
सम्पूर्ण स्वच्छता के सात घटकों में पहला पेयजल का सुरक्षित रख रखाव,दूसरा बेकार पानी का सुरक्षित निपटान,तीसरा मानव मल का सुरक्षित निपटान,चौथा ठोस कचरे का निपटान,पांचवां व्यक्तिगत स्वच्छता,छटा घर एवं भोजन की सफ़ाई और सातवां घटक समुदायिक एवं ग्रामीण स्वच्छता शामिल है.इन सभी घटकों की शत प्रतिशत पूर्ति करने वाली पंचायत निर्मल ग्राम पुरस्कार की हक़दार होती हैं