Saturday, October 18, 2008
जीवन से भरी ऑंखें
मैं जब भी किसी से मिलता हूँ,बरबस आँखों मैं जीवन ढूंढता हूँ.कुछ चंद आँखों मैं मुझे जीवन की हलचल दिखाई पडती है,लेकिन ऐसी ऑंखें बहुत कम दिखती हैं,अधिकतर आँखों मैं तो जीवन ही दिखाई नहीं पड़ता,मेरी आदत जीवन देखने की है,यही कारण है की मैं हरेक की आँखों मैं झांकता फिरता हूँ.कतिपय ऑंखें जीवन के इर्दगिर्द नजर आती हैं परन्तु अन्ततःउनमें जीवन दिखाई नहीं देता,मैं ढूंढता रह जाता हूँ,जीवन नजर नहीं आता,सच नहीं आता.
mahendrashekhawat
अपने बारे में पूरी तरह विश्वस्त मैं आपसे मुखातिब हूँमैं जानता हूँ की मेरी खासियतें हर किसी को मालूम नहीं लेकिन ये भरोसा भारी है कि मेरी ये खासियतें मुझे मेरे ढूँढने वालों तक ले जायेगीहालाँकि अपने बारे मैं ऐसा कुछ कहना अजीब लगता है लेकिन इतना अजीब भी नहीं,क्यों कि इस दुनिया मैं किसी के पास इतना समय कहाँ है जो ढूंढता फिरे,इसीलिये अपनी खूबी या खासियत बतानी जरूरी हैयकीनन अज के लोगों को सच्चाई पसंद है लेकिन इसे बताने वाले नहीं मिलते,इसलिए यह प्रयत्न करना जरूरी हैमैं इसलिए परेशान रहता हूँ कि मुझे आज तक कोई ऐसा नाम नहीं मिला जिसे मैं अपना गोड फादर कह सकूँ,गोड फादरों की कमी है या मैं पहचान नहीं पाया ये नहीं जानता
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