हमारा देश आज भी आम आदमी को बिमारियों से मुक्त करने में कामयाब नहीं हो पा रहा है,समूचा विश्व आज अपने नागरिकों को स्वस्थ जीवन देने की हर मुमकिन कोशिश कर रहा है,यू.एन.ओ.के यूनिसेफ ने भारत में सम्पूर्ण स्वास्थ्य के मध्यनजर महत्वपूर्ण पहलकदमी की है,बहुत आश्चर्य की बात है की भारत में आज भी दो लाख टन मैला रोजाना धरती पर खुले में फैलता है,यानि हमारे देश की पैंसठ प्रतिशत आबादी खुले में शोच करती है,इस खुली गंदगी से फैलने वाले किटानू हमारी क्षमता को रोक कर प्रतिरोधक क्षमता को खत्म करते हैं.यह आश्चर्य की बात है कि एक ग्राम मानव मल में एक करोड़ बैक्टेरिया होते हैं जो शारीरिक नुकसान पहुँचने में समर्थ होते हैंहमारे देश में आज भी रोजाना एक हजार बच्चे गंदगी के कारन मौत के मुंह में चले जाते हैं,एक हजार माताओं की कोख रोजाना सूनी हो जाती है,यानि प्रतिदिन एक रेल दुर्घटना का आंकडा हम रोजाना देखते हैं।
पन्द्रह अक्टूबर को हमने ग्लोबल हैण्ड वाशिंग डे मनाया,इसके पीछे की मूल भावना भी गंदगी से हो रही बर्बादी की जानकारी जन जन तक पहुँचाना था.हमारे देश में सिर्फ़ पैंतीस फीसदी लोग खाना खाने से पहले हाथ अच्छी तरह धोते हैं,इसी प्रकार मात्र पैंसठ फीसदी लोग शोच के बाद साबुन से हाथ धोते हैं,इस कारन गंदगी का अवशेष हाथों के माध्यम से मानव शरीर के भीतर चला जाता है और बीमारी लगातार बनी रहती है।
भारत सरकार ने सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान चला कर गंदगी के विरूद्ध जंग छेड़ दी है,सन २०१२ तक समूचा भारत घर घर में शोचालयों से युक्त होगा ऐसा संकल्प संजोया गया है.इसे अंजाम तक पहुँचने के लिए सरकार ने निर्मल ग्राम पुरस्कार योजना प्रारम्भ की है,जिसके तहत सम्पूर्ण स्वच्छता के सभी सात घटक पूरे करने वाली ग्राम पंचायतों को राष्ट्रीय निर्मल ग्राम पुरस्कार एक भव्य समारोह में भारत के महामहिम राष्ट्रपति द्वारा दिया जाता है.इस परिणाम को देखकर संतुष्टि है की जहाँ वर्ष २००३ में ऐसी पंचायतों की संख्या शून्य थी,२००४-०५ में ३८ पंचायतों को निर्मल ग्राम पुरस्कार मिला,वर्ष २००५-०६ में यह संख्या बढ़ कर ७६० हो गई वहीं २००६-०७ में देश की ४९४५ ग्राम पंचायतों को निर्मल ग्राम पुरस्कार प्राप्त हुआ .इस वर्ष २००७-०८ में यह संख्या बढ़ कर ग्यारह हजार पंचायतों से भी अधिक हो गई,स्पष्ट है की भारत में स्वच्छता के प्रति जागृति तेजी से बढ़ रही है।
निर्मल ग्राम पुरस्कार के तहत एक हजार आबादी वाली पंचायत को पचास हजार रूपये,दो हजार आबादी तक वाली पंचायत को एक लाख रूपये,पॉँच हजार आबादी तक वाली पंचायत को दो लाख रूपये,दस हजार तक आबादी वाली पंचायत को चार लाख रूपये तथा दस हजार से अधिक आबादी वाली पंचायत को पॉँच लाख रूपये पुरस्कार के रूप में दिए जाते हैं।
सम्पूर्ण स्वच्छता के सात घटकों में पहला पेयजल का सुरक्षित रख रखाव,दूसरा बेकार पानी का सुरक्षित निपटान,तीसरा मानव मल का सुरक्षित निपटान,चौथा ठोस कचरे का निपटान,पांचवां व्यक्तिगत स्वच्छता,छटा घर एवं भोजन की सफ़ाई और सातवां घटक समुदायिक एवं ग्रामीण स्वच्छता शामिल है.इन सभी घटकों की शत प्रतिशत पूर्ति करने वाली पंचायत निर्मल ग्राम पुरस्कार की हक़दार होती हैं
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Sunday, October 19, 2008
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