चरभर चरभर खेलता गैरी जाल्लां री छांव!
बटाऊ आंव्ता-जान्व्ता नासेठू गैला मांय,
लुक मीचणी कुरा घुत्तो धोलियो भाटो खेलता,
झाद्दकी री बाड़ा मान्खर बा चालती लाय.....
कोई तो मने बताओ रै कठै गया बै गांव ???
काचर खेलरी फोफलिया,काकदिये रा बीज,
खेरडी पर मांड्यो हिंदों सावनियै री तीज,,
लुळ लुळ हिंडती तीजन्याँ लहरिये री खीज,
सुरंगों बायरो सिरकतो होलै साँव साँव ,,,,
कोई तो मनै बताओ रे भाई कठै गया बै गांव.....
कठै गया बै गांव,कठै गया बै गांव ............?
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