मैनें एक बार माँ से कहा था-"माँ मुझे रात को डर लगता है1उस रात से मैनें माँ को कभी रात को सोते हुए नहीं देखा"।
सहज अंदाज मैं बडी से बडी समस्या का निवारण माँ !
अद्भुत साहस अविकल अहसास का आभास माँ !!
चूल्हे चाकी पनघट बाखल होकर हर पल आसपास माँ !!!
पलक झपकते अहसासों की आवृति स्पंदन का मधुमास माँ !!!!
जिजीविषा ही रही तेरे क़दमों मैं पुष्प बिछाने की ममतामयी,
तेरे भीतर के पुराने फफोलों को सहलाने की तुझे बहलाने की ,
सिहर उठता हूँ यह सोच कर कि किस कदर सिहरती रही है तूँ,
तेरे जीवन का एक एक पल क्योंकर सिहर सिहर गुजरा होगा?
संसाधनों के बियावनों में मुझे बचाने को क्या क्या न किया होगा तूने !
अपनी गोद मैं उठा कर मीलों तक अनथक पैदल चलने वाली देवी!!!
स्निग्ध सुकोमल उस पावन स्पर्श को तत्समय मैं मूढ़ न जान सका !
सहज अंदाज मैं बडी से बडी समस्या का निवारण माँ !
अद्भुत साहस अविकल अहसास का आभास माँ !!
चूल्हे चाकी पनघट बाखल होकर हर पल आसपास माँ !!!
पलक झपकते अहसासों की आवृति स्पंदन का मधुमास माँ !!!!
जिजीविषा ही रही तेरे क़दमों मैं पुष्प बिछाने की ममतामयी,
तेरे भीतर के पुराने फफोलों को सहलाने की तुझे बहलाने की ,
सिहर उठता हूँ यह सोच कर कि किस कदर सिहरती रही है तूँ,
तेरे जीवन का एक एक पल क्योंकर सिहर सिहर गुजरा होगा?
संसाधनों के बियावनों में मुझे बचाने को क्या क्या न किया होगा तूने !
अपनी गोद मैं उठा कर मीलों तक अनथक पैदल चलने वाली देवी!!!
स्निग्ध सुकोमल उस पावन स्पर्श को तत्समय मैं मूढ़ न जान सका !
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1 comment:
bhavuk kar diya aapne...................
badhai_____
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