माँ तेरे बिना ये कैसी दीपावली?
इस बार कुछ अलग सी दीपावली है,मन कुछ अलग सी अनुभूति से अभिभूत है,
ऐसा लगता है कहीं कोई रिक्तिका सी है
किसी का अभाव भीतर से कचोटता है
समवेत स्वर कुछ दबे दबे से हैं
मन के झिलमिल दीप बुझे बुझे हैं
आशाओं के आख्यानों पर झीना परदा है
मन की उमंगों को कोई जैसे दबोचता है
ममतामई हाथों का सुहाना स्पर्श
उन आँखों से छलकता निस्पृह आशीष
दीपावली पर निर्झर बहता प्रेम स्रोत
अनजाने मैं ही सही मुझे अब भी सहेजता है
मैं सिर्फ़ तेरे आशीर्वाद का फल हूँ
तेरी वजह से तेरे अतीत का कल हूँ
तूं चाहे कहीं भी हो मेरे आसपास है
फ़िर भी इस दिवाली पर बहुत विकल हूँ !!!
कार्तिक कृष्ण अमावश्या,२०६५!दीपावली २००८!२८-१०-२००८
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1 comment:
this blank space is mumma's always with you
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