फरवरी 2013,स्वच्छ भारत मिशन बीकानेर का कार्यभार सँभालने के तुरंत बाद गुरु कृपा से महाकुम्भ इलाहाबाद जाने का सुअवसर प्राप्त हुआ| जब देश में कोई भी स्वच्छता का जिक्र नहीं करता था तब बीकानेर में बंको बिकाणों अभियान का सृजन कर जिले को ओडीएफ बनाने का संकल्प संजोया|अप्रेल 2013 से संचालित यह सफ़र बिना रुके अनवरत लगातार चल और चलता ही गया|जिला,राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर इस अभियान के लिए सम्मानित होने के साथ ही जिले को ओडीएफ बनाने का यह सुखद संकल्प पूर्ण हुआ|21 अप्रेल 2016 को सिविल सर्विसेस दिवस पर नई दिल्ली के विज्ञानं भवन में देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी के हाथों राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त करके राजस्थान के पहले एवं देश के दूसरे जिले के रूप में गौरवान्वित होने के पश्चात 11 मई 2016 को सिंहस्थ कुम्भ उज्जैन में गुरुकृपा से जाने का अवसर मिला|
कुम्भ से कुम्भ तक की इस महायात्रा में अनेक मुकाम आये और अंततः मंजिल मिली|
ब्लॉग लिखे एक अरसा हो गया अब इसे वापस शुरू किया जा रहा है,अनवरत जारी रहेगा यह सिलसिला| यह ब्लॉग लिखने का कारण भी अजीब है।उज्जैन के महाकुंभ में समर्थ सद्गुरू श्रीधर जी ब्रह्मचारीजी महाराज के सानिध्य में कुछ दिन रहना और पूर्ण आध्यात्मिक वांगमय को आत्मसात् करने के अतिरिक्त यहाँ परिजनों को भी आध्यात्मिक अतिरेक का एहसास करवाना एक कारण रहा।यह अनुभूत सत्य है कि आप इस जहान में आध्यात्मिक स्फुर्णा और ऊर्जा के बिना कामयाब नहीं हो सकते।महाकाल की नगरती उज्जैन में समर्थ सद्गुरू के आशीर्वाद तले रह कर जीवन को सुधारने का अभूतपूर्व अवसर किसी वरदान से कम नहीं।उज्जैन में गुरुदेव का आदेश हुआ कि क्षिप्रा का स्नान तो हुआ,अब नर्मदा मैया में। स्नान का सुख और पुण्य प्राप्त करो और नेमावर आश्रम में जा कर वहाँ की सात्विकता का आनंद उठाओ।हम सबब लोग अपन्नी दोनों गाड़ियों से गुरुदेव के शिष्य शुक्ला जी के मार्गदर्शन में नेमावर पहुँच गये,गुरुगृह में आनंद लिया,नर्मदा स्नान किया।
कुम्भ से कुम्भ तक की इस महायात्रा में अनेक मुकाम आये और अंततः मंजिल मिली|
ब्लॉग लिखे एक अरसा हो गया अब इसे वापस शुरू किया जा रहा है,अनवरत जारी रहेगा यह सिलसिला| यह ब्लॉग लिखने का कारण भी अजीब है।उज्जैन के महाकुंभ में समर्थ सद्गुरू श्रीधर जी ब्रह्मचारीजी महाराज के सानिध्य में कुछ दिन रहना और पूर्ण आध्यात्मिक वांगमय को आत्मसात् करने के अतिरिक्त यहाँ परिजनों को भी आध्यात्मिक अतिरेक का एहसास करवाना एक कारण रहा।यह अनुभूत सत्य है कि आप इस जहान में आध्यात्मिक स्फुर्णा और ऊर्जा के बिना कामयाब नहीं हो सकते।महाकाल की नगरती उज्जैन में समर्थ सद्गुरू के आशीर्वाद तले रह कर जीवन को सुधारने का अभूतपूर्व अवसर किसी वरदान से कम नहीं।उज्जैन में गुरुदेव का आदेश हुआ कि क्षिप्रा का स्नान तो हुआ,अब नर्मदा मैया में। स्नान का सुख और पुण्य प्राप्त करो और नेमावर आश्रम में जा कर वहाँ की सात्विकता का आनंद उठाओ।हम सबब लोग अपन्नी दोनों गाड़ियों से गुरुदेव के शिष्य शुक्ला जी के मार्गदर्शन में नेमावर पहुँच गये,गुरुगृह में आनंद लिया,नर्मदा स्नान किया।

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